बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा निकाला गया विज्ञापन कहाँ तक जायज है ?

बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा 2022-23 सीजन के लिए बी सी सी आई के द्वारा आयोजित होने वाले घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बिहार क्रिकेट टीम ( पुरूष एवं महिला ) के लिए चयनकर्ता,प्रशिक्षक, ट्रेनर ,और फिजियो, वैगरह के नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया तथा इच्छुक लोगों से आवेदन मांगे गए हैं।

इस विज्ञापन में टीम के प्रबंधक के लिए किसी भी तरह का कोई भी आवेदन का जिक्र नही है और नाहि उम्र का जिक्र है तथा जो शर्त रखा गया है वो भी कहीं से जस्टिस लोढा के संविधान के अनुसार अनुरूप नहीं है ।

कुछ दिन पहले हिन्द आवाज ने संविधान के अनुसार कार्य नहीं होने का जिक्र किया था फिर भी इस और ध्यान नहीं दिया गया, लगता है बिहार क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों को संविधान की कोई जानकारी नहीं है या कोई योजना के तहत इस तरह का कार्य कर रहे हैं, और तो और बिहार क्रिकेट संघ सी ई ओ को भी कोई जानकारी नहीं है संविधान के बारे में।

जबकि जस्टिस लोढा के संविधान के अनुसार ही सभी पदाधिकारी चुनाव जीत कर आए हैं और तो और बिहार क्रिकेट संघ के सी ई ओ का भी नियुक्ति संविधान के अनुसार ही हुआ है, ये अलग बात है कि इस नियुक्ति के लिए भी विज्ञापन निकाला जाना चाहिए था जो की नहीं निकाला गया तथा सीधे नियुक्ति कर दिया गया। बिहार क्रिकेट संघ अपने असंवैधानिक कार्य के लिए ही जाना जाता है। एक और बहुत ही दिलचस्प पद की रचना किया गया है।

“Principle coach cum cricketing consultant for team Bihar – Applicant must have played at least 5 matches in test/ ODI/t20 in Indian cricket team with vast experience in coaching.”

वाह क्या बात है भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार इस तरह का कोई पद का रचना किया गया है, कहीं ये पद एक पुर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी जो की मैच फिक्सिंग में लिप्त पायें गये थे उसके लिए तो नहीं है  ? क्योकि कुछ दिन पहले इस खिलाड़ी से बिहार क्रिकेट संघ के पदाधिकारी दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं।

पिछले दो वर्षों से किसी भी support staff का जो विभिन्न बिहार क्रिकेट टीम से जुड़े हुए थे उनका पैसे का भुगतान नहीं किया गया है। बी सी सी आई के तरफ से कोई किसी भी तरह का अनुदान संविधान के अनुसार कार्य नहीं करने के और निवंधन नहीं होने कारण मिल रहा है और मिलने का कोई आसार है।

और तो और बिहार क्रिकेट संघ का बैंक का खाता भी बंद है दो वर्षों से। अब तो और भी उम्मीद नहीं बिहार क्रिकेट संघ के तीन पदाधिकारी को सचिव, सयुक्त सचिव और जिला प्रतिनिधि को असंवैधानिक लोकपाल के द्वारा अध्यक्ष के इशारे पर committee of management से बाहर कर दिया गया है। अब तो भगवान ही बचाए बिहार क्रिकेट संघ को।