वैष्णव संप्रदाय के संत श्री रंग रामानुजाचार्य जी महाराज का 90 वर्ष की उम्र में निधन

वैष्णव संप्रदाय के संत श्री रंग रामानुजाचार्य जी महाराज का निधन हो गया। 90 वर्षीय स्वामी जी पिछले एक सप्ताह से बीमार थे। पटना के एक निजी अस्पताल में गुरुवार की शाम 4:55 बजे स्वामी जी ने अंतिम सांस ली। इस खबर के बाद साधु संतों और अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गयी। अस्पताल के पास ही बड़ी संख्या में अनुनायी एकत्र हो गए। उनके निधन से ना केवल अनुयायियों में बल्कि लक्ष्मी नारायण मंदिर के आसपास के गांवों में भी मातम छा गया।

मिली जानकारी के अनुसार पार्थिव शरीर को अनुयायियों के दर्शन के लिए लक्ष्मी नारायण मंदिर हुलासगंज के परिसर में लाया जा रहा है। शुक्रवार को अनुनायियों के दर्शानार्थ अरवल स्थित सरौती मठ में ले जाया जाएगा। स्वामी रंग रामानुजाचार्य महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1935 को जहानाबाद जिले के मिर्जापुर गांव में हुआ था। उनके पिता राम सेवक शर्मा के दो पुत्रों में श्री रंगरामानुजाचार्य जी महाराज का बचपन गांव में ही बीता। कक्षा दो तक अपने गांव के स्कूल में पढ़ाई की।

बाद में उन्हें हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्ति के लिए शकूराबाद हाई स्कूल में नामांकन कराया गया। इस बीच 15 वर्ष की आयु में सरौती जाकर उन्होंने स्वामी परांकुशाचार्य से दीक्षा ली। प्रथमा मध्यमा शास्त्री करने के बाद व्याकरण वेदांत न्याय आदि विषयों में आचार्य की डिग्री प्राप्त की। व्याकरण एवं न्याय शास्त्र में उन्हें स्वर्ण पदक मिला था। न्याय की पढ़ाई करने के लिए कुछ दिनों तक दरभंगा में भी रहे। वर्ष 1969 में अपने गुरु के साथ उन्होंने हुलासगंज की धरती पर चरण रखा तथा अपने दिव्यता एवं विद्वता के बल पर स्थानीय लोगों के बीच अमिट छाप छोड़ी।


वेदांत दर्शन न्याय एवं मीमांसा में आचार्य की डिग्री प्राप्त 90 वर्षीय स्वामी रंग रामानुजाचार्य जी महाराज ने अपने जीवन के 70 वर्ष धर्म आध्यात्म समाज एवं संस्कृति में सुधार के क्षेत्र में जो काम किया है। उन्होंने भागवत रामायण एवं अन्य 32 पुस्तकें भी लिखी जो आज भी उनके अनुयायियों के लिए पूजनीय है। संस्कृत भाषा के विकास तथा सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने ना सिर्फ हुलासगंज बल्कि उत्तर प्रदेश बिहार तथा उड़ीसा जैसे जगहों पर भी शैक्षणिक संस्थाओं को स्थापित किया।