बिहार BJP में सुशील मोदी जैसे नेता की कमी को दूर करना जरूरी: आचार्य व्यंकटेश शर्मा

बोचहा उपचुनाव और विधान परिषद चुनाव में एनडीए के खराब प्रदर्शन ने बिहार की राजनीति को राष्ट्रीय पटल पर चर्चा का विषय बना दिया है। इसी कड़ी में बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी एनडीए के खराब प्रदर्शन के लिए गुरुवार को इशारे में नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराना कहीं न कहीं गठबंधन में दरार का इशारा करती है। उन्होंने साफ कहा कि एनडीए नेतृत्व दोनों चुनावी परिणाम की समीक्षा करे,ताकि समय रहते कमियां दूर की जा सकें।

सुशील मोदी के इस बयान को लेकर भाजपा के सक्रीय नेता व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पटना के पूर्व प्रत्याशीआचार्य व्यकंटेश शर्मा उर्फ डब्लू का कहना है कि 2019 के संसदीय चुनाव में एनडीए के घटक दलों ने पूरे तालमेल से एक-दूसरे को जिताने के लिए मेहनत की थी, जिससे हमारा स्ट्राइक रेट अधिकतम था। गठबंधन के खाते में राज्य की 40 में से 39 सीटें आई थीं। विधान परिषद और विधानसभा उप चुनाव में एनडीए के घटक दलों के बीच 2019 जैसा तालमेल क्यों नहीं रहा, इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए।

भाजपा नेता वेंकटेश शर्मा ने एनडीए गठबंधन के मुखिया नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि राजद या यूं कहे बिहार में मरे हुए लालू प्रसाद और उनकी पार्टी को जिंदा करने का काम किया है। आज उन्हीं की यह देन है कि बिहार में तेजस्वी के नेतृत्व में राजद अपनी जमीन तेजी से तैयार कर रही है। यह वहीं राजद है जिसने सवर्णो का एक भी अपने कार्यकाल में चलने नहीं दिया। बिहार के सामाजिक और राजीनीतिक हालात पर गौर करें तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सवर्ण समाज यहां कितना बड़ा बदलाव करने में सक्षम है।

परंतु बात बिहार में एनडीए के गिरते जनाधार की करें तो बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को विचार करना चाहिए। बिहार बीजेपी के नेता की बात करें तो सुशील मोदी ही एक ऐसे शख्स रहे जिन्होंने लालू-नीतीश के एक होने पर लालू यादव के काले कारनामों का खुलासा कर नीतीश को पुन: बीजेपी से गठबंधन करने को मजबूर कर दिया। इतना ही नहीं बिहार में बीजेपी की साख को अपने दम पर जीवंत रखते हुए हर मोर्चे पर आगे ले जाने का काम करते आए है। पर, शीर्ष नेतृत्व ने पूर्व उपमुख्यमंत्री के पार्टी के प्रति समर्पण को नजरअंदाज कर बीजेपी को रसताल में ले जाने का काम बिहार में कर दिया।

यदि देखा जाए तो सुशील मोदी को राज्य सभा भेजना और बिहार में बीजेपी में फूट की लौ पनपना है। सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर साथ लेकर चलने वाले सुशील मोदी के बिहार की राजनीति से दूर होने का ही परिणाम है कि एनडीए गठबंधन में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। वक्त रहते बीजेपी शीर्ष नेतृत्व व एनडीए गठबंधन के नेताओं को अपनी गलतियों को दूर कर पार्टी में एकजुटता लाने का काम अभी से शुरू कर देना होगा। इसके लिए सुशील मोदी जैसे कर्तव्यनिष्ठ व पार्टी के लिए सक्रिय रहने वाले नेता की जरूरत है बिहार को।