पटना जिला क्रिकेट संघ के चुनाव को असंवैधानिक बताने वाले लोकपाल पर खुद असंवैधानिक मामला अदालत में चल रहा है

बिहार क्रिकेट संघ के लोकपाल का हवाला देकर पटना जिला क्रिकेट संघ के चुनाव को असंवैधानिक बताने वाले लोकपाल पर खुद असंवैधानिक मामला अदालत में चल रहा है और तो और बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी के असंवैधानिक होंने का मामला भी अदालत में चल रहा है।

किसी भी जिला क्रिकेट संघ के मामले में बिहार क्रिकेट संघ का कोई दखल देने का अधिकार नहीं है।

राकेश तिवारी अध्यक्ष बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा किए गए असंवैधानिक कार्य। जस्टिस लोढ़ा के संविधान के अनुसार हर पद के लिए बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा विज्ञापन निकालकर आवेदन लेकर पद पर नियुक्ति करना है जैसे सीईओ, बिहार क्रिकेट टीम के लिए प्रशिक्षक ट्रेनर फिजियो मैनेजर बगैरा। जो कि नहीं किया गया । जब चाहे प्रशिक्षक को बदल दे जब चाहे मैनेजरों को बदल दे। इसके अलावा ज्यादा तर सपोर्ट स्टाफ का चयन संविधान के अनुसार नहीं किया गया था।

13 वर्ष से पटना जिला क्रिकेट संघ का चुनाव नहीं हुआ है तो क्या जस्टिस लोढ़ा के संविधान के अनुसार यह सही है।

पटना जिला क्रिकेट संघ का चुनाव 13 वर्ष के बाद हुआ है तो इस चुनाव को असंवैधानिक कैसे बता सकते हैं। इस बर्ष पटना जिला क्रिकेट संघ के नये निर्वाचित सचिव श्री सुनील रोहित के नेतृत्व में आयोजित सीनियर डिविजन और जूनियर डिविजन का तारीफ पटना के तमाम पुर्व खिलाड़ी और वर्तमान खिलाड़ियों के द्वारा किया गया है।

बिहार क्रिकेट संघ के द्वारा इतने असंवैधानिक कार्य हुए हैं कि बिहार क्रिकेट संघ का बैंक खाता 2 बर्ष से बंद है तथा इस तरह के असंवैधानिक कार्य के कारण बिहार क्रिकेट संघ का संविधान भी बिहार सरकार के सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर नही हो रहा है  जिसके कारण बीसीसीआई ने बिहार क्रिकेट संघ को क्रिकेटर के विकास के लिए कोई भी अनुदान अभी तक इस बिहार क्रिकेट संघ के चुनाव के बाद नहीं दिया है।

अजय नारायण शर्मा जो कि पिछले 13 वर्षों से पटना जिला क्रिकेट संघ के सचिव पद पर बिना चुनाव कराए असंवैधानिक तरीके से सचिव पद पर बने हुए हैं, और अभी कुछ दिनों पहले उनके द्वारा एक पीआईएल की गई है बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी के द्वारा किए जा रहे असंवैधानिक कार्य के खिलाफ, क्या अध्यक्ष बिहार क्रिकेट संघ इससे डरकर पटना जिला क्रिकेट संघ के चुनाव को असंवैधानिक करार दे रहे हैं?

राकेश तिवारी अध्यक्ष बिहार क्रिकेट संघ इसी तरह के अपने असंवैधानिक कार्य को छुपाने के लिए अभी तक किसी भी बिहार क्रिकेट संघ के मीटिंग में किसी भी आजीवन सदस्य को नहीं बुलाते हैं।

राकेश तिवारी अध्यक्ष बिहार क्रिकेट संघ किस आधार पर चुनाव के द्वारा चुने गए पदाधिकारी सचिव संजय कुमार तथा संयुक्त सचिव कुमार अरविंद को असंवैधानिक तरीके से बिहार क्रिकेट संघ से निष्कासित कर दिया, सचिव संजय कुमार पर हितो के टकराव का आरोप लगाया है तो फिर उपाध्यक्ष दिलीप सिंह पर क्यो नही,उनहोंने भी अपने बेटे को रणजी ट्रॉफी के टीम में शामिल कराया है

जस्टिस लोढा के संविधान के अनुसार इस समय बहुत से पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है चाहे जिला क्रिकेट संघ में हो या बिहार क्रिकेट संघ में उसके बाबजूद वे लोग अपने पद पर बने हुऐ हैं। क्या ये सर्वोच्य न्यायालय के आदेश का उल्लंघन नहीं है ? क्या इनलोगो के खिलाफ सर्वोच्य न्यायालय के आदेश का अवमानना का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाना चाहिए  ?

अगर कुछ जिला क्रिकेट संघ को छोड़ दिया जाए तो ज्यादा तर जिला में सर्वोच्य न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हो रहा है, साथ साथ हितों का टकराव भी हो रहा है । जब तक जस्टिस लोढा के संविधान के अनुसार बिहार क्रिकेट संघ कार्य नहीं करता तब तक बिहार क्रिकेट संघ का संविधान बिहार सरकार के सोसायटी एक्ट रजिस्टर्ड नहीं होगा और इसके कारण बिहार क्रिकेट का विकास नही होगा क्योकि बी सी सी आई भी कोई अनुदान नहीं देगा।